बरसों से वो,
मुझे मिली तो नही
लेकिन कई दिनों से
रात सपनों में मिलती है
कुछ कहती तो नही
चुपचाप खामोश-सी रहती है
तकिये के पास सारी रात
गुमसुम-सी बैठी रहती है
सुबह होते ही चली जाती है
मैं खुद से बस यही पूछता हूँ
सबकुछ तो खत्म हो गया कबका
और अब बाकी क्या रह गया है
हम दोनों के बीच...
कुछ रह गया है हमदोनों के बीच...
- Blogger Comment
- Facebook Comment
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
0 comments:
Post a Comment